वह यह जानकर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है;
26यहोवा से उठ्ठार पाने की आशा रखकर चुपचाप रहना भला है।
27पुरूष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है।
28वह यह जानकर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है;
29वह अपना मुंह धूल में रखे, कया जाने इस में कुछ आशा हो;
30वह अपना गाल अपने मारनेवाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे।
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