और इसलिये कि मसीह की नियुक्ति बिना शपथ नहीं हुई।
18निदान, पहिली आज्ञा निर्बल; और निष्फल होने के कारण लोप हो गई।
19(इसलिये कि व्यवस्था ने किसी बात की सिद्धि नहीं कि) और उसके स्थान पर एक ऐसी उत्तम आशा रखी गई है जिस के द्वारा हम परमेश्वर के समीप जा सकते हैं।
20और इसलिये कि मसीह की नियुक्ति बिना शपथ नहीं हुई।
21(क्योंकि वे तो बिना शपथ याजक ठहराए गए पर यह शपथ के साथ उस की ओर से नियुक्त किया गया जिस ने उसके विषय में कहा, कि प्रभु ने शपथ खाई, और वह उस से फिर ने पछताएगा, कि तू युगानुयुग याजक है)।
22सो यीशु एक उत्तम वाचा का जामिन ठहरा।
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