निदान, पहिली आज्ञा निर्बल; और निष्फल होने के कारण लोप हो गई।
16जो शारीरिक आज्ञा की व्यवस्था के अनुसार नहीं, पर अविनाशी जीवन की सामर्थ के अनुसार नियुक्त हो तो हमारा दावा और भी स्पष्टता से प्रगट हो गया।
17क्योंकि उसके विषय में यह गवाही दी गई है, कि तू मलिकिसिदक की रीति पर युगानुयुग याजक है।
18निदान, पहिली आज्ञा निर्बल; और निष्फल होने के कारण लोप हो गई।
19(इसलिये कि व्यवस्था ने किसी बात की सिद्धि नहीं कि) और उसके स्थान पर एक ऐसी उत्तम आशा रखी गई है जिस के द्वारा हम परमेश्वर के समीप जा सकते हैं।
20और इसलिये कि मसीह की नियुक्ति बिना शपथ नहीं हुई।
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