तब तू पराई स्त्री से बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है।।
3उनको अपनी उंगलियों में बान्ध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले।
4बुद्धि से कह कि, तू मेरी बहिन है, और समझ को अपनी साथिन बना;
5तब तू पराई स्त्री से बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है।।
6मैं ने एक दिन अपने घर की खिड़की से, अर्थात् अपने झरोखे से झांका,
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