उनको अपनी उंगलियों में बान्ध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले।
1हे मेरे पुत्रा, मेरी बातों को माना कर, और मेरी आज्ञाओं को अपने मन में रख छोड़।
2मेरी आज्ञाओं को मान, इस से तू जीवित रहेगा, और मेरी शिक्षा को अपनी आंख की पुतली जान;
3उनको अपनी उंगलियों में बान्ध, और अपने हृदय की पटिया पर लिख ले।
4बुद्धि से कह कि, तू मेरी बहिन है, और समझ को अपनी साथिन बना;
5तब तू पराई स्त्री से बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है।।
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