मेरी आंखों से मेरी प्रजा की पुत्री के विनाश के कारण जल की धाराएं बह रही है।
46हमारे सब शत्रुओं ने हम पर अपना अपना मुंह फैलाया है;
47भय और गड़हा, उजाड़ और विनाश, हम पर आ पड़े हैं;
48मेरी आंखों से मेरी प्रजा की पुत्री के विनाश के कारण जल की धाराएं बह रही है।
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