हमारे सब शत्रुओं ने हम पर अपना अपना मुंह फैलाया है;
44तू ने अपने को मेघ से घेर लिया है कि तुझ तक प्रार्थना न पहुंच सके।
45तू ने हम को जाति जाति के लोगों के बीच में कूड़ा- कर्कट सा ठहराया है।
46हमारे सब शत्रुओं ने हम पर अपना अपना मुंह फैलाया है;
47भय और गड़हा, उजाड़ और विनाश, हम पर आ पड़े हैं;
48मेरी आंखों से मेरी प्रजा की पुत्री के विनाश के कारण जल की धाराएं बह रही है।
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