मेरी आंख से लगातार आंसू बहते रहेंगे,
47भय और गड़हा, उजाड़ और विनाश, हम पर आ पड़े हैं;
48मेरी आंखों से मेरी प्रजा की पुत्री के विनाश के कारण जल की धाराएं बह रही है।
49मेरी आंख से लगातार आंसू बहते रहेंगे,
50जब तक यहोवा स्वर्ग से मेरी ओर न देखे;
51अपनी नगरी की सब स्त्रियों का हाल देखने पर मेरा दु:ख बढ़ता है।
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