और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक जाज्य से दूसरे में फिरते तो रहे,
18मैं कनान देश तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा।
19उस समय तो तुम गिनती में थोड़े थे, वरन बहुत ही थोड़े और उस देश में परदेशी थे।
20और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक जाज्य से दूसरे में फिरते तो रहे,
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