मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो।
20और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक जाज्य से दूसरे में फिरते तो रहे,
22मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो।
23हे समस्त पृथ्वी के लोगो यहोवा का गीत गाओ। प्रतिदिन उसके किए हुए उठ्ठार का शुभ समाचार सुनाते रहो।
24अन्यजातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्य- कम का वर्णन करो।
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