वह तो पृथ्वी की छोर तक ताकता रहता है, और सारे आकाशमणडल के तले देखता भालता है।
22विनाश ओर मृत्यु कहती हैं, कि हमने उसकी चर्चा सुनी है।
23परन्तु परमेश्वर उसका मार्ग समझता है, और उसका स्थान उसको मालूम है।
24वह तो पृथ्वी की छोर तक ताकता रहता है, और सारे आकाशमणडल के तले देखता भालता है।
25जब उस ने वायु का तौल ठहराया, और जल को नपुए में नापा,
26और मेंह के लिये विधि और गर्जन और बिजली के लिये मार्ग ठहराया,
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