और मेंह के लिये विधि और गर्जन और बिजली के लिये मार्ग ठहराया,
24वह तो पृथ्वी की छोर तक ताकता रहता है, और सारे आकाशमणडल के तले देखता भालता है।
25जब उस ने वायु का तौल ठहराया, और जल को नपुए में नापा,
26और मेंह के लिये विधि और गर्जन और बिजली के लिये मार्ग ठहराया,
27तब उस ने बुध्दि को देखकर उसका बखान भी किया, और उसको सिठ्ठ करके उसका पूरा भेद बूझ लिया।
28तब उस न मनुष्य से कहा, देख, प्रभु का भय मानना यही बुध्दि हैे और बुराई से दूर रहना यही समझ है।
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