एज्रा 3:5

और उसके बाद नित्य होमबलि और नये नये चान्द और यहोवा के पवित्रा किए हुए सब नियत पव के बलि और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये सब स्वेच्छाबलि हर एक के लिये बलि चढ़ाए।

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3तब उन्हों ने वेदी को उसके स्थान पर खड़ा किया क्योंकि उन्हें उस ओर के देशों के लोगों का भय रहा, और वे उस पर यहोवा के लिये होमबलि अर्थात् प्रतिदिन सबेरे और सांझ के होमबलि चढ़ाने लगे।

4और उन्हों ने झोपड़ियों के पर्व को माना, जैसे कि लिखा है, और प्रतिदिन के होमबलि एक एक दिन की गिनती और नियम के अनुसार चढ़ाए।

5और उसके बाद नित्य होमबलि और नये नये चान्द और यहोवा के पवित्रा किए हुए सब नियत पव के बलि और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये सब स्वेच्छाबलि हर एक के लिये बलि चढ़ाए।

6सातवें महीने के पहिले दिन से वे यहोवा को होमबलि चढ़ाने लगे। परन्तु यहोवा के मन्दिर की नेव तब तक न डाली गई थी।

7तब उन्हों ने पत्थ्र गढ़नेवालों और कारीगरों को रूपया, और सीदोनी और सोरी लोगों को खने- पीने की वस्तुएं और तेल दिया, कि वे फारस के राजा कुस्रू के पत्रा के अनुसार देवदार की लकड़ी लबानोन से जापा के पास के समुद्र में पहुंचाएं।

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