होम- बलियों और पाप- बलियों से तू प्रसन्न नहीं हुआ।
4क्योंकि अनहोना है, कि बैलों और बकरों का लोहू पापों को दूर करे।
5इसी कारण वह जगत में आने समय कहता है, कि बलिदान और भेंट तू ने न चाही, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया।
6होम- बलियों और पाप- बलियों से तू प्रसन्न नहीं हुआ।
7तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्रा शस्त्रा में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं।
8ऊपर तो वह कहता है, कि न तू ने बलिदान और भेंट और होम- बलियों और पाप- बलियों को चाहा, और न उन से प्रसन्न हुआ; यद्यपि ये बलिदान तो व्यवस्था के अनुसार चढ़ाए जाते हैं।
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