क्योंकि अनहोना है, कि बैलों और बकरों का लोहू पापों को दूर करे।
2नहीं तो उन का चढ़ाना बन्द क्यों न हो जाता? इसलिये कि जब सेवा करनेवाले एक ही बार शुद्ध हो जाते, तो फिर उन का विवेक उन्हें पापी न ठहराता।
3परन्तु उन के द्वारा प्रति वर्ष पापों का स्मरण हुआ करता है।
4क्योंकि अनहोना है, कि बैलों और बकरों का लोहू पापों को दूर करे।
5इसी कारण वह जगत में आने समय कहता है, कि बलिदान और भेंट तू ने न चाही, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया।
6होम- बलियों और पाप- बलियों से तू प्रसन्न नहीं हुआ।
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