प्रधान लोग चुप रहते थे और उनकी जीभ तालू से सट जाती थी।
8तब तब जवान मुझे देखकर छिप जाते, और पुरनिये उठकर खड़े हो जाते थे।
9हाकिम लोग भी बोलने से रूक जाते, और हाथ से मुंह मूंदे रहते थे।
10प्रधान लोग चुप रहते थे और उनकी जीभ तालू से सट जाती थी।
12क्योंकि मैं दोहाई देनेवाले दीन जन को, और असहाय अनाथ को भी छुड़ाता था।
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