जब लेमेक एक सौ बयासी वर्ष का हुआ, तब उस ने एक पुत्रा जन्म दिया।
26और लेमेक के जन्म के पश्चात् मतूशेलह सात सौ बयासी वर्ष जीवित रहा, और उसके और भी बेटे बेटियां उत्पन्न हुई।
27और मतूशेलह की कुल अवस्था नौ सौ उनहत्तर वर्ष की हुई : तत्पश्चात् वह मर गया।।
28जब लेमेक एक सौ बयासी वर्ष का हुआ, तब उस ने एक पुत्रा जन्म दिया।
29और यह कहकर उसका नाम नूह रखा, कि यहोवा ने जो पृथ्वी को शाप दिया है, उसके विषय यह लड़का हमारे काम में, और उस कठिन परिश्रम में जो हम करते हैं, हम को शान्ति देगा।
30और नूह के जन्म के पश्चात् लेमेक पांच सौ पंचानवे वर्ष जीवित रहा, और उसके और भी बेटे बेटियां उत्पन्न हुई।
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