और यह कहकर उसका नाम नूह रखा, कि यहोवा ने जो पृथ्वी को शाप दिया है, उसके विषय यह लड़का हमारे काम में, और उस कठिन परिश्रम में जो हम करते हैं, हम को शान्ति देगा।
27और मतूशेलह की कुल अवस्था नौ सौ उनहत्तर वर्ष की हुई : तत्पश्चात् वह मर गया।।
28जब लेमेक एक सौ बयासी वर्ष का हुआ, तब उस ने एक पुत्रा जन्म दिया।
29और यह कहकर उसका नाम नूह रखा, कि यहोवा ने जो पृथ्वी को शाप दिया है, उसके विषय यह लड़का हमारे काम में, और उस कठिन परिश्रम में जो हम करते हैं, हम को शान्ति देगा।
31और लेमेक की कुल अवस्था सात सौ सतहत्तर वर्ष की हुई : तत्पश्चात् वह मर गया।।
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