राजा को विदित हो, कि हम लोग यहूदा नाम प्रान्त में महान परमेश्वर के भवन के पास गए थे, वह बड़े बड़े पत्थ्रों से बन रहा है, और उसकी भीतों में कड़ियां जुड़ रही हैं; और यह काम उन लोगों से फुत के साथ हो रहा है, और सुफल भी होता जाता है।
7उन्हों ने उसको एक चिट्ठी लिखी, जिस में यह लिखा था : कि राजा दारा का कुशल क्षेम सब प्रकार से हो।
8राजा को विदित हो, कि हम लोग यहूदा नाम प्रान्त में महान परमेश्वर के भवन के पास गए थे, वह बड़े बड़े पत्थ्रों से बन रहा है, और उसकी भीतों में कड़ियां जुड़ रही हैं; और यह काम उन लोगों से फुत के साथ हो रहा है, और सुफल भी होता जाता है।
10और हम ने उनके नाम भी पूछे, कि हम उनके मुख्य पुरूषों के नाम लिखकर तुझ को जता सकें।
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