क्योकि पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है।
24कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, बरन औरों की।
25जो कुछ कस्साइयों के यहां बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो।
26क्योकि पृथ्वी और उसकी भरपूरी प्रभु की है।
27और यदि अविश्वायिों में से कोई तुम्हें नेवता दे, और तुम जाना चाहो, तो जो कुछ तुम्हारे साम्हने रखा जाए वही खाओ: और विवेक के कारण कुछ न पूछो।
28परन्तु यदि कोई तुम से कहे, यह तो मूरत को बलि की हुई वस्तु है, तो उसी बतानेवाले के कारण, और विवेक के कारण न खाओ।
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