कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, बरन औरों की।
22क्या हम प्रभु को रिस दिलाते हैं? क्या हम उस से शक्तिमान हैं?
24कोई अपनी ही भलाई को न ढूंढे, बरन औरों की।
25जो कुछ कस्साइयों के यहां बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें