यहेजकेल 26:15

परमेश्वर यहोवा सोर से यों कहता है, तेरे गिरने के शब्द से जब घायल लोग कराहेंगे और तुझ में घात ही घात होगा, तब क्या टापू न कांप उठेंगे?

प्रसंग सहित पढ़ें · यहेजकेल 26

13और मैं तेरे गीतों का सुरताल बन्द करूंगा, और तेरी वीणाओं की ध्वनि फिर सुनाई न देगी।

14मैं तुझे नंगी चट्टान कर दूंगा; तू जाल फैलाने ही का स्थान हो जाएगा; और फिर बसाया न जाएगा; क्योंकि मुझ यहोवा ही ने यह कहा है, परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है।

15परमेश्वर यहोवा सोर से यों कहता है, तेरे गिरने के शब्द से जब घायल लोग कराहेंगे और तुझ में घात ही घात होगा, तब क्या टापू न कांप उठेंगे?

16तब समुद्रतीर के सब प्रधान लोग अपने अपने सिंहासन पर से उतरेंगे, और अपने बागे़ और बूटेदार वस्त्रा उतारकर थरथराहट के वस्त्रा पहिनेंगे और भूमि पर बैठकर क्षण क्षण में कांपेंगे; और तेरे कारण विस्मित रहेंगे।

17और वे तेरे विषय में विलाप का गीत बनाकर तुझ से कहेंगे, हाय ! मल्लाहों की बसाई हुई हाय ! सराही हुई नगरी जो समुद्र के बीच निवासियों समेत सामथ रही और सब टिकनेवालों की डरानेवाली नगरी थी, तू कैसी नाश हुई है?

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