मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना मांस खाता है।
3वरन उन दोनों से अधिकर सुभागी वह है जो अब तक हुआ ही नहीं, न ये बुरे काम देखे जो संसार में होते हैं।।
5मूर्ख छाती पर हाथ रखे रहता और अपना मांस खाता है।
6चैन के साथ एक मुट्ठर एप उसे मुटि्ठयों से अच्छा है, जिनके साथ परिश्रम और मन का कुढ़ना हो।।
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