और घोड़ों और वेग चलनेवाले घोड़ों के लिये जव और पुआल जहां प्रयोजन पड़ता था वहां आज्ञा के अनुसार एक एक जन पहुंचाया करता था।
26फिर उसके रथ के घोड़ों के लिये सुलैमान के चालीस हज़ार थान थे, और उसके बारह हज़ार सवार थे।
28और घोड़ों और वेग चलनेवाले घोड़ों के लिये जव और पुआल जहां प्रयोजन पड़ता था वहां आज्ञा के अनुसार एक एक जन पहुंचाया करता था।
30और सुलैमान की बुध्दि पूर्व देश के सब निवासियों और मिस्रियों की भी बुध्दि से बढ़कर बुध्दि थी।
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