धर्म और न्याय करना, यहोवा को बलिदान से अधिक अच्छा लगता है।
1राजा का मन नालियों के जल की नाई यहोवा के हाथ में रहता है, जिधर वह चाहता उधर उसको फेर देता है।
2मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में तो ठीक होता है, परन्तु यहोवा मन को जांचता है,
3धर्म और न्याय करना, यहोवा को बलिदान से अधिक अच्छा लगता है।
4चढ़ी आंखें, घमण्डी मन, और दुष्टों की खेती, तीनों पापमय हैं।
5कामकाजी की कल्पनाओं से केवल लाभ होता है, परन्तु उतावली करनेवाले को केवल घटती होती है।
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