चढ़ी आंखें, घमण्डी मन, और दुष्टों की खेती, तीनों पापमय हैं।
2मनुष्य का सारा चालचलन अपनी दृष्टि में तो ठीक होता है, परन्तु यहोवा मन को जांचता है,
3धर्म और न्याय करना, यहोवा को बलिदान से अधिक अच्छा लगता है।
4चढ़ी आंखें, घमण्डी मन, और दुष्टों की खेती, तीनों पापमय हैं।
5कामकाजी की कल्पनाओं से केवल लाभ होता है, परन्तु उतावली करनेवाले को केवल घटती होती है।
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