हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी?
7उनके न तो कोई न्यायी होता है, न प्रधान, और न प्रभुता करनेवाला,
8तौभी वे अपना आहार धूपकाल में संचय करती हैं, और कटनी के समय अपनी भोजनवस्तु बटोरती हैं।
9हे आलसी, तू कब तक सोता रहेगा? तेरी नींद कब टूटेगी?
10कुछ और सो लेना, थोड़ी सी नींद, एक और झपकी, थोड़ा और छाती पर हाथों रखे लेटे रहना,
11तब तेरा कंगालपन बटमार की नाई और तेरी घटी हथियारबन्द के समान आ पड़ेगी।।
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