वह अपने सिंहासन के साम्हने बादल फैलाकर उसको छिपाए रखता है।
7वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना अेक पृथ्वी को लटकाए रखता है।
8वह जल को अपनी काली घटाओं में बान्ध रखता, और बादल उसके बोझ से नहीं फटता।
9वह अपने सिंहासन के साम्हने बादल फैलाकर उसको छिपाए रखता है।
10उजियाले और अन्धियारे के बीच जहां सिवाना बंधा है, वहां तक उस ने जलनिधि का सिवाना ठहरा रखा है।
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