हमारे मन का हर्ष जाता रहा, हमारा नाचना विलाप में बदल गया है।
13जवानों को चक्की चलानी पड़ती है; और लड़केबाले लकड़ी का बोझ उठाते हुए लडखड़ाते हैं।
14अब फाटक पर पुरनिये नहीं बैठते, न जवानों का गीत सुनाई पड़ता है।
15हमारे मन का हर्ष जाता रहा, हमारा नाचना विलाप में बदल गया है।
16हमारे सिर पर का मुकुट गिर पड़ा हे; हम पर हाय, क्योंकि हम ने पाप किया है !
17इस कारण हमारा हृदय निर्बल हो गया है, इन्हीं बातों से हमारी आंखें धुंधली पड़ गई हैं,
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