इस कारण हमारा हृदय निर्बल हो गया है, इन्हीं बातों से हमारी आंखें धुंधली पड़ गई हैं,
15हमारे मन का हर्ष जाता रहा, हमारा नाचना विलाप में बदल गया है।
16हमारे सिर पर का मुकुट गिर पड़ा हे; हम पर हाय, क्योंकि हम ने पाप किया है !
17इस कारण हमारा हृदय निर्बल हो गया है, इन्हीं बातों से हमारी आंखें धुंधली पड़ गई हैं,
18क्योंकि सिरयोन पर्वत उजाड़ पड़ा है; उस में सियार घूमते हैं।
19परन्तु हे यहोवा, तू तो सदा तक विराजमान रहेगा; तेरा राज्य पीढ़ी- पीढ़ी बना रहेगा।
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