उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगनेवाला पुरूष मैं ही हूं;
1उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगनेवाला पुरूष मैं ही हूं;
2वह मुझे ले जाकर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है;
3उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरूद्ध उठता रहता है।
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