उसका घर मैं ने निर्जल देश को, और उसका निवास लोनिया भूमि को ठहराया है।
4उनके बच्चे हृष्टपुष्ट होकर मैदान में बढ़ जाते हैं; वे निकल जाते और फिर नहीं लौटते।
5किस ने बनैले गदहे को स्वाधीन करके छोड़ दिया है? किस ने उसके बन्धन खोले हैं?
6उसका घर मैं ने निर्जल देश को, और उसका निवास लोनिया भूमि को ठहराया है।
7वह नगर के कोलाहल पर हंसता, और हांकनेवाले की हांक सुनता भी नहीं।
8पहाड़ों पर जो कुछ मिलता है उसे वह चरता वह सब भांति की हरियाली ढूंढ़ता फिरता है।
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