पहाड़ों पर जो कुछ मिलता है उसे वह चरता वह सब भांति की हरियाली ढूंढ़ता फिरता है।
6उसका घर मैं ने निर्जल देश को, और उसका निवास लोनिया भूमि को ठहराया है।
7वह नगर के कोलाहल पर हंसता, और हांकनेवाले की हांक सुनता भी नहीं।
8पहाड़ों पर जो कुछ मिलता है उसे वह चरता वह सब भांति की हरियाली ढूंढ़ता फिरता है।
9क्या जंगली सांढ़ तेरा काम करने को प्रसन्न होगा? क्या वह तेरी चरनी के पास रहेगा?
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