और जब इन की क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा।।
17(फिर वह यह कहता है, कि) मैं उन के पापों को, और उन के अधर्म के कामों को फिर कभी स्मरण न करूंगा।
18और जब इन की क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा।।
20जो उस ने परदे अर्थात् अपने शरीर में से होकर, हमारे लिये अभिषेक किया है,
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