उठो, हम रात ही रात चढ़ाई करें और उसके महलों को ढा दें।
3चरवाहे अपनी अपनी भेड़- बकरियां संग लिए हुए उस पर चढ़कर उसके चारों ओर अपने तम्बू खड़े करेंगे, वे अपने अपने पास की घास चरा लेंगे।
4आओ, उसके विरूद्ध युठ्ठ की तैयारी करो; उठो, हम दो पहर को चढ़ाई करें ! हाय, हाय, दिन ढलता जाता है, और सांझ की परछाई लम्बी हो चली है !
5उठो, हम रात ही रात चढ़ाई करें और उसके महलों को ढा दें।
6सेनाओं का यहोवा तुम से कहता है, वृक्ष काट काटकर यरूशलेम के विरूद्व दमदमा बान्धोे ! यह वही नगर है जो दणड के योग्य है; इस में अन्धेर ही अनधेर भरा हुआ है।
7जैसा कूएं में से नित्य नया जल निकला करता है, वैसा ही इस नगर में से नित्य नई बुराई निकलती है; इस में उत्पात और उपद्रव का कोलाहल मचा रहता है; चोट और मारपीट मेरे देखने में निरन्तर आती है।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें