प्रकाशित वाक्य 8:5

और स्वर्गदूत ने धूपदान लेकर उस में वेदी की आग भरी, और पृथ्वी पर डाल दी, और गर्जन और शब्द और बिजलियां और भूईडोल होने लगा।।

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3फिर एक और स्वर्गदूत सोने का धूपदान लिये हुए आया, और वेदी के निकट खड़ा हुआ; और उस को बहुत धूप दिया गया, कि सब पवित्रा लोगों की प्रार्थनाओं के साथ उस सोनहली वेदी पर जो सिंहासन के साम्हने है चढ़ाए।

4और उस धूप का धुआं पवित्रा लोगों की प्रार्थनाओं सहित स्वर्गदूत के हाथ से परमेश्वर के साम्हने पहुंच गया।

5और स्वर्गदूत ने धूपदान लेकर उस में वेदी की आग भरी, और पृथ्वी पर डाल दी, और गर्जन और शब्द और बिजलियां और भूईडोल होने लगा।।

6और वे सातों स्वर्गदूत जिन के पास सात तुरहियां थी, फंूकने को तैयार हुए।।

7पहिले स्वर्गदूत ने तुरही फूंकी, और लोहू से मिले हुए ओले और आग उत्पन्न हुई, और पृथ्वी पर डाली गई; और पृथ्वी की एक तिहाई जल गई, और सब हरी घास भी जल गई।।

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