विपत्ति और कल्याण, क्या दोनों परमप्रधान की आज्ञा से नहीं होते?
36और किसी मनुष्य का मुक़ मा बिगाड़ना, इन तीन कामों को यहोवा देख नहीं सकता।
37यदि यहोवा ने आज्ञा न दी हो, तब कौन है कि वचन कहे और वह पूरा हो जाए?
38विपत्ति और कल्याण, क्या दोनों परमप्रधान की आज्ञा से नहीं होते?
39सो जीवित मनुष्य क्यों कुड़कुड़ाए? और पुरूष अपने पाप के दण्ड को क्यों बुरा माने?
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें