किसी एदोमी से घृणा न करना, क्योंकि वह तेरा भाई है; किसी मिद्दी से भी घृणा न करना, क्योंकि उसके देश में तू परदेशी होकर रहा था।
6तू जीवन भर उनका कुशल और भलाई कभी न चाहना।
7किसी एदोमी से घृणा न करना, क्योंकि वह तेरा भाई है; किसी मिद्दी से भी घृणा न करना, क्योंकि उसके देश में तू परदेशी होकर रहा था।
8उनके जो परपोते उत्पन्न हों वे यहोवा की सभा में न आने पाएं।
9जब तू शत्रुओं से लड़ने को जाकर छावनी डाले, तब सब प्रकार की बुरी बातों से बचा रहना।
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