श्रेष्‍ठगीत 8:9

यदि वह शहरपनाह हो तो हम उस पर चान्दी का कंगूरा बनाएंगे; और यदि वह फाटक का किवाड़ हो, तो हम उस पर देवदारू की लकड़ी के पटरे लगाएंगे।।

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7पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता, और न महानदों से डूब सकता है। यदि कोई अपने घर की सारी सम्पत्ति प्रेम की सन्ती दे दे तौभी वह अत्यन्त तुच्छ ठहरेगी।।

8हमारी एक छोटी बहिन है, जिसकी छातियां अभी नहीं उभरी। जिस दिन हमारी बहिन के ब्याह की बात लगे, उस दिन हम उसके लिये क्या करें?

9यदि वह शहरपनाह हो तो हम उस पर चान्दी का कंगूरा बनाएंगे; और यदि वह फाटक का किवाड़ हो, तो हम उस पर देवदारू की लकड़ी के पटरे लगाएंगे।।

10मैं शहरपनाह थी और मेरी छातियां उसके गुम्मट; तब मैं अपने प्रेमी की दृष्टि में शान्ति लानेवाले के नाईं थी।।

11बाल्हामोन में सुलैमान की एक दाख की बारी थी; उस ने वह दाख की बारी रखवालों को सौंप दी; हर एक रखवाले को उसके फलों के लिये चान्दी के हजार हजार टुकड़े देने थे।

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