अरयूब ने और भी अपनी गूढ़ बात उठाई और कहा,
1अरयूब ने और भी अपनी गूढ़ बात उठाई और कहा,
2भला होता, कि मेरी दशा बीते हुए महीनों की सी होती, जिन दिनों में ईश्वर मेरी रक्षा करता था,
3जब उसके दीपक का प्रकाश मेरे सिर पर रहता था, और उस से उजियाला पाकर मैं अन्धेरे में चलता था।
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