जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है।।
2जो उजियाले को चादर की नाई ओढ़े रहता है, और आकाश को तम्बू के समान ताने रहता है,
4जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है।।
5तू ने पृथ्वी को उसकी नीव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए।
6तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्रा से; जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।
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