और तुम आप ही निर्णय क्यों नहीं कर लेते, कि उचित क्या है?
55और जब दक्खिना चलती दखते हो तो कहते हो, कि लूह चलेगी, और ऐसा ही होता है।
57और तुम आप ही निर्णय क्यों नहीं कर लेते, कि उचित क्या है?
59मैं तुम से कहता हूं, कि जब तक तू दमड़ी दमड़ी भर न देगा तब तक वहां से छूटने न पाएगा।।
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