आंगन की भीत की चौड़ाई में पूर्व की ओर अलग स्थान और भवन दोनों के साम्हने कोठरियां थीं।
8क्योंकि बाहरी आंगन की कोठरियां पचास हाथ लम्बी थीं, और मन्दिर के साम्हने की अलंग सौ हाथ की थी।
9और इन कोठरियों के नीचे पूर्व की ओर मार्ग था, जहां लोग बाहरी आंगन से इन में जाते थे।
10आंगन की भीत की चौड़ाई में पूर्व की ओर अलग स्थान और भवन दोनों के साम्हने कोठरियां थीं।
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