क्योंकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्तु मनुष्यों के निकट भी भली हैं हम उन की चिन्ता करते हैं।
19और इतना ही नहीं, परन्तु वह कलीसिया से ठहराया भी गया कि इस दान के काम के लिये हमारे साथ जाए और हम यह सेवा इसलिये करते हैं, कि प्रभु की महिमा और हमारे मन की तैयारी प्रगट हो जाए।
20हम इस बात में चौकस रहते हैं, कि इस उदारता के काम के विषय में जिस की सेवा हम करते हैं, कोई हम पर दोष न लगाते पाए।
21क्योंकि जो बातें केवल प्रभु ही के निकट नहीं, परन्तु मनुष्यों के निकट भी भली हैं हम उन की चिन्ता करते हैं।
22और हम ने उसके साथ अपने भाई को भेजा है, जिस को हम ने बार बार परख के बहुत बातों में उत्साही पाया है; परन्तु अब तुम पर उस को बड़ा भरोसा है, इस कारण वह और भी अधिक उत्साही है।
23यदि कोई तितुस के विषय में पूछे, तो वह मेरा साथी, और तुम्हारे लिये मेरा सहकर्मी है, और यदि हमारे भाइयों के विषय में पूछे, तो वे कलीसियाओं के भेजे हुए और मसीह की महिमा हैं।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें