फिर दोषबलि की व्यवस्था यह है। वह परमपवित्रा है;
1फिर दोषबलि की व्यवस्था यह है। वह परमपवित्रा है;
2जिस स्थान पर होमबलिपशु का वध करते हैं उसी स्थान पर दोषबलिपशु का भी बलि करें, और उसके लोहू को याजक वेदी पर चारों ओर छिड़के।
3और वह उस में की सब चरबी को चढ़ाए, अर्थात् उसकी मोटी पूंछ को, और जिस चरबी से अंतड़ियां ढपी रहती हैं वह भी,
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