क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।।
32हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे।
33अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ, जो पुराने नहीं होते, अर्थात् स्वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिस के निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता।
34क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।।
35तुम्हारी कमरें बन्धी रहें, और तुम्हारे दीये जलते रहें।
36और तुम उन मनुष्यों के समान बनो, जो अपने स्वामी की बाट देख रहे हों, कि वह ब्याह से कब लौटेगा; कि जब वह आकर द्वार खटखटाए,स्राते तुरन्त उसके खोल दें।
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