पृथ्वी भर के बंधुओं को पांव के तले दलित करना,
32चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करूणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;
33क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।
34पृथ्वी भर के बंधुओं को पांव के तले दलित करना,
35किसी पुरूष का हक़ परमप्रधान के साम्हने मारना,
36और किसी मनुष्य का मुक़ मा बिगाड़ना, इन तीन कामों को यहोवा देख नहीं सकता।
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