जो मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिथराता है।
21जब बलवन्त मनुष्य हथियार बान्धे हुए अपने घर की रखवाली करता है, तो उस की संपत्ति बची रहती है।
22पर जब उस से बढ़कर कोई और बलवन्त चढ़ाई करके उसे जीत लेता है, तो उसके वे हथियार जिन पर उसका भरोसा था, छीन लेता है और उस की संपत्ति लूटकर बांट देता है।
23जो मेरे साथ नहीं बटोरता वह बिथराता है।
24जब अशुद्ध आत्मा मनुष्य में से निकल जाती है तो सूखी जगहों में विश्राम ढूंढ़ती फिरती है; और जब नहीं पाती तो कहती है; कि मैं अपने उसी घर में जहां से निकली थी लौट जाऊंगी।
25औश्र आकर उसे झाड़ा- बुहारा और सजाढाया पाती है।
इस पद को अन्य भाषाओं में भी पढ़ें