ढीले हाथों को दृढ़ करो और थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करो।
1जंगल और निर्जल देश प्रफुल्लित होंगे, मरूभूमि मगन होकर केसर की नाईं फूलेगी;
3ढीले हाथों को दृढ़ करो और थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करो।
5तब अन्धों की आंखे खोली जाएंगी और बहिरों के कान भी खोले जाएंगे;
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