उन्हों ने उसे भूनी मछली का टुकड़ा दिया।
40यह कहकर उस ने उनहें अपने हाथ पांव दिखाए।
41जब आनन्द के मारे उन को प्रतीति न हुई, और आश्चर्य करते थे, तो उस ने उन से पूछा; क्या यहां तुम्हारे पास कुछ भोजन है?
42उन्हों ने उसे भूनी मछली का टुकड़ा दिया।
43उस ने लेकर उन के साम्हने खाया।
44फिर उस ने उन से कहा, ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों।
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